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Saturday, June 20, 2015

 विधि विशेष दीपावली लक्ष्मी पूजन 
हवन करना दिवाली जैसे अति व्यस्त पर्व पर अति कठिन है इसीलिये इस तंत्र पर्व की रात्रि में श्री यन्त्र, कुबेर, कनकधारा, व व्यापार वृद्धि यंत्रों के माध्यम से मन्त्रों की उपासना पूजा की जाये तो विशेष फल दाई होती है।  

यन्त्र शिरोमणि श्री यन्त्र -लक्ष्मीनारायण के साथ 108 देवी-देवताओं का स्वरुप लिए यह यन्त्र सभी पांचों यंत्रों में सर्वशक्तिशाली है। इस यन्त्र में समग्र ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति तथा विकास क्रम दिखाए गए हंै। धन, संतान, वैवाहिक जीवन, शिक्षा व आध्यात्मिक उन्नति के लिए इस यन्त्र का पूजा सर्वमान्य है। 

कुबेर यंत्र -देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की पूजा अर्चना, व्यक्ति को कुबेर के समान ही तपस्वी, साहसी, व संघर्शशील बनाती है।
 कनकधारा यंत्र  -वास्तुदोष, वायुदोष का नाश तथा  धन, समृद्धि व शांति के स्थायी निवास के लिए जिससे घर तथा कार्यस्थल का वातावरण दोष रहित व सुखमय हो। 
लक्ष्मी विनायक गणपति यन्त्र -उपरोक्त यंत्रों से मिली शक्ति के सही इस्तेमाल, उत्तम विचार व सही बुद्धि के लिए यह पूजा जाता है। आज के युग में वही व्यक्ति उन्नति कर सकता है जिसके पास स्पष्ट मौलिक विचार व उन्हें प्रस्तुत करने की क्षमता हो। 
व्यापार वृद्धि यन्त्र -ये महायंत्र यंत्रों को और प्रभावशाली बनाकर चैतरफा उन्नति प्रदाता है। 

दक्षिण वर्ती शंख - भगवती महालक्ष्मी और दक्षिणवर्ती शंख की उत्पत्ति तीर्थ राज सागर से हुई है, अतः ये लक्ष्मी के मित्र हंै; फिर भगवान विष्णु भी इसे अपने हाथ में धारण करते हंै, अतः महालक्ष्मी यंत्र के साथ पूजे जाने से विशेष फल दाई भी हंै। इससे पूजन को एक बना बनाया वातावरण मिलता है। 
कमलगट्टे की माला - कमल पुष्प जो लक्ष्मी जी का आसान भी है - के बीज से तैयार की गयी माला से लक्ष्मी जी का मंत्र जप किया जाता है। यह जप बहुत ही सरल व कार्य सिद्ध करने वाला होता है। इस जप में बार-बार लक्ष्मी जी का नाम पुकारा जाता है तथा अपनी इच्छा भी दोहराई जाती है। 
अष्टगध व इत्र-वातावरण को शुद्ध व पवित्र बनाने के लिए लक्ष्मी जी से सम्बंधित यन्त्र पर व अन्य देवी देवताओं के पूजा स्थल पर, उनके आदर सत्कार के लिए शुद्ध अष्टगंध, केसर, का तिलक लगा कर, धूप, इत्र का प्रयोग लक्ष्मी व अन्य शक्तियों को आमंत्रण देने में सहयोगी होता है।
 उपरोक्त सामग्री- महालक्ष्मी महायंत्र, दक्षिण वर्ती शंख, किसी विद्वान द्वारा पूर्णतया शुद्ध व अभिमंत्रित प्राणप्रतिष्ठा करवा लेनी चाहिए। बाजार से खरीद कर सीधे उन्हंे पूजा शामिल कर लेना फलदायी नहीं होगा। सभी अथवा कोई भी एक माध्यम अपनी पूजा में शामिल कर पूजा को प्रभाव शाली बनायें। 
अपने कार्य को सिद्ध करने वाले मंत्र ,पूजा का समय, पूजा की दिशा, दीपक का प्रयोग आदि के बारे में सम्पूर्ण विधि की जानकारी उपरोक्त सभ माध्यम प्राण प्रतिष्ठित व अभिमंत्रित रूप में परिषद कार्यालय में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है।